आपदा के इस समय में अस्पताल बड़े उद्योग बन गए हैं- सुप्रीम कोर्ट 

आपदा के इस समय में अस्पताल बड़े उद्योग बन गए हैं- सुप्रीम कोर्ट 

नईदिल्ली [ महामीडिया] उच्चतम न्यायालय ने कहा कि महामारी के दौर में अस्पताल मानवता की सेवा करने के बजाय बड़े रियल एस्टेट उद्योग की तरह हो गए हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने निर्देश दिया कि आवासीय इलाकों में दो-तीन कमरे के फ्लैट में चलने वाले ‘नर्सिंग होम’ आग और भवन सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हैं, इसलिए उन्हें बंद किया जाना चाहिए।न्यायालय ने भवन उपनियमों के उल्लंघन में सुधार लाने के लिए समय सीमा अगले वर्ष जुलाई तक बढ़ाने पर गुजरात सरकार की खिंचाई की और ‘पूर्णाधिकार पत्र’ अधिसूचना शीर्ष अदालत के 18 दिसंबर के आदेश के विपरीत है और ऐसी स्थिति में आग लगने की घटनाओं से लोग मरते रहेंगे.जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा, ‘आप (गुजरात सरकार) समय सीमा बढ़ाते रहे हैं जिसे पिछले वर्ष 18 दिसंबर के हमारे फैसले के परिप्रेक्ष्य में नहीं किया जा सकता है। अस्पताल कठिनाई के समय में रोगियों को राहत प्रदान करने के लिए होते हैं न कि नोट छापने की मशीन होते हैं।’अदालत ने कहा कि आपदा के इस समय में अस्पताल बड़े उद्योग बन गए हैं और आवासीय कॉलोनी में दो-तीन कमरे के फ्लैट से चलने वाले इस तरह के नर्सिंग होम को काम करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

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