आज ही के दिन हुआ था अंतरिक्ष का बड़ा हादसा

आज ही के दिन हुआ था अंतरिक्ष का बड़ा हादसा

नई दिल्ली (महामीडिया) आज ही के दिन 19 साल पहले स्पेस जगत में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी गूंज अमेरिका और भारत के साथ-साथ दुनियाभर में सुनाई दी. दरअसल, एक फरवरी 2003 को अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का स्पेस शटल कोलंबिया में पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश के दौरान विस्फोट हो गया. इस हादसे में सातों एस्ट्रोनोट्स की मौत हो गई. मरने वाले लोगों में भारतीय मूल की कल्पना चावला भी शामिल थीं, जो अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थीं. स्पेस शटल प्रोग्राम के तहत हुआ ये दूसरा सबसे घातक दुर्घटना थी.
एसटीएस-107 मिशन को 16 जनवरी 2003 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था. इसने ऑर्बिट में अपने 15 दिन, 22 घंटे, 20 मिनट, 32 सेकेंड के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रयोग किए. दुर्घटना के बाद एक जांच की शुरुआत हुई, जो अगले सात महीनों तक चला. इस हादसे के बाद भारत में भी शोक लहर दौड़ गई है. जिस भारतीय बेटी ने देश का नाम रोशन किया था, अब वह दुनिया को अलविदा कह चुकी थी. दूसरी ओर, स्पेस शटल के मलबे की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया.
एस्ट्रोनोट्स की याद में बनाया गया संग्रहालय
कोलंबिया स्पेस शटल का मलबा टेक्सास, लुइसियाना और अर्कांसस में सैकड़ों मील तक फैला गया था. इन मलबों को इकट्ठा किए जाने का काम शुरू किया गया. वहीं, बड़े पैमाने पर किए गए अभियान के बाद स्पेस शटल के लगभग 84 हजार टुकड़ों को बरामद किया गया. फिर इसे कैनेडी स्पेस सेंटर के व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में स्टोर किया गया. इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की याद में टेक्सास के हेम्फिल, सबाइन काउंटी में ‘रिमेम्बरिंग कोलंबिया’ के नाम से एक संग्रहालय स्थापित किया गया है.
मिशन में जान गंवाने वाले लोगों में कौन लोग शामिल थे?
इस हादसे में जान गंवाने लोगों में कमांडर रिक हसबैंड, पायलट विलियम सी. मैककूल, पेलोड कमांडर/मिशन स्पेशलिस्ट माइकल पी. एंडरसन और मिशन स्पेशलिस्ट डेविड एम. ब्राउन शामिल थे. इसके अलावा, मिशन स्पेशलिस्ट कल्पना चावला, मिशन स्पेशलिस्ट लॉरेल क्लार्क और पेलोड स्पेशलिस्ट इलान रेमन ने इस हादसे में जान गंवाई. 
हादसे की वजह क्या थी?
कोलंबिया दुर्घटना जांच बोर्ड ने अपनी जांच में पाया कि विस्फोट से 16 दिन पहले कोलंबिया स्पेस शटल के एक विंग के आगे वाले हिस्से में छेद था. जब शटल ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया तो इस छेद की वजह से गर्म वायुमंडलीय गैसें हीट शील्ड में घुसने लगीं. इससे विंग का अंदर का हिस्सा नष्ट हो गया और स्पेसक्राफ्ट अस्थिर होकर नीचे गिरने लगा. वहीं, आगे जाकर ये टुकड़ों में बिखर गया. 
 

सम्बंधित ख़बरें