तीज-त्योहारः 'मोरयाई छठ' है आज

तीज-त्योहारः 'मोरयाई छठ' है आज

भोपाल (महामीडिया) भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मोरयाई छठ का व्रत रखा जाता है. इसे मोर छठ, बलदेव छठ, देवछठ या कुछ स्थानों पर सूर्य षष्ठी व्रत भी कहते हैं. मोरयाई छठ आज है. मोरयाई का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान, सूर्योपासना, जप एवं व्रत किया जाता है। इस दिन सूर्य पूजन, गंगा स्नान एवं दर्शन तथा पंचगव्य सेवन से अश्वमेध के समान फल प्राप्त होता है। इस दिन व्रती को नमक रहित भोजन दिन में एक बार ही ग्रहण करना चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य अशुभ हो, उन्हें इस दिन ये उपाय करना चाहिए. ब्रज के राजा और भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज बलदेव जी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाता है. 
जो जातक मोरयाई छठ के दिन विधानपूर्वक स्नान, दान और पूजा करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ जितना फल मिलता है. जिस परिवार में किसी की शादी हुई है, तो उनकी शादी के श्रृंगार में शामिल मोर (मुकुट) एवं मानीखबं को जलाशय में विसर्जित किया जाता है. पुरुषों के लिए सूर्य की पूजा तेज एवं लाभ को प्रदान करेगी.
सूर्य षष्ठी व्रत के दौरान श्रद्धालु गायत्री मंत्र का स्मरण भी करते हैं. 
सूर्य षष्ठी के दिन सूर्योदय पूर्व दैनिक कर्म से निवृत होकर घर या घर के समीप बने किसी जलाशय, नदी, नहर में स्नान करना चाहिए. स्नान करने के पश्चात उगते हुए सूर्य की आराधना करनी चाहिए. भगवान सूर्य को जलाशय में खड़े होकर अर्ध्य देना चाहिए. शुद्ध घी से दीपक जलाएं. कपूर, धूप, लाल पुष्प आदि से भगवान सूर्य का पूजन करें. उसके बाद दिन भर भगवान सूर्य का मनन करना चाहिए. 

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