तीज-त्योहारः 'संतान सप्तमी' है आज

तीज-त्योहारः 'संतान सप्तमी' है आज

भोपाल (महामीडिया) भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी व्रत का अपना अलग महत्व है. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी तिथि के दिन संतान सप्तमी व्रत किया जाता है. आज मुक्ताभरण संतान सप्तमी व्रत किया जाएगा. यह व्रत विशेष रुप से संतान प्राप्ति, संतान रक्षा और संतान की उन्नति के लिए किया जाता है. इस व्रत में भगवान शिव एवं माता गौरी की पूजा का विधान होता है.
संतान सप्तमी 2021 : शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त 11:58 सुबह – 12:47 दोपहर
अमृत ​​काल 10:45 सुबह – 12:46 प्रात:
ब्रह्म मुहूर्त 04:40 प्रात: – 05:28 प्रात:
संतान सप्तमी 2021 : महत्व
संतान सप्तमी व्रत हमारे अपने बच्चों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए मनाया जाता है. प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, इसे पुरुष बच्चे का आशीर्वाद भी माना जाता है. संतान सप्तमी व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है लेकिन ये अक्सर माता और पिता दोनों द्वारा बच्चों की खुशी और सफलता के लिए मनाया जाता है.
संतान सप्तमी व्रत पूजन विधि
संतान सप्तमी के दिन माताएं सुबह स्नान कर भगवान शिव और मां पार्वती के समक्ष व्रत करने का संकल्प लें. इस दिन निराहार रहते हुए शुद्धता के साथ पूजन का प्रसाद तैयार कर लें. इसके लिए खीर-पूरी व गुड़ के 7 पुए या फिर 7 मीठी पूरी भोग के लिए बनाना उत्तम माना गया है. इस व्रत की पूजा दोपहर के समय तक कर लेनी चाहिए. पूजा के लिए धरती पर चौक बनाएं उस पर चौकी रखें और शंकर पार्वती की मूर्ति स्थापित करें. इसके बाद कलश की स्थापना करें, उसमें आम के पत्तों के साथ नारियल रखें. अब आरती की थाली तैयार कर लें जिसमें हल्दी, कुमकुम, चावल, कपूर, फूल, कलावा आदि सामग्री रखें. भगवान के समक्ष दीपक जलाएं. अब 7 मीठी पूड़ी को केले के पत्ते में बांधकर उसे पूजा स्थान पर रखें और संतान की रक्षा व उन्नति के लिए प्रार्थना करते हुए भगवान शिव को कलावा अर्पित करें.
पूजा के समय सूती का डोरा या फिर चांदी की संतान सप्तमी की चूड़ी हाथ में जरूर पहननी चाहिए. यह व्रत माता और पिता दोनों के द्वारा किया जा सकता है. पूजन के बाद धूप, दीप नेवैद्य अर्पित कर संतान सप्तमी की कथा जरूर पढ़ें या सुनें और बाद में कथा की पुस्तक का भी पूजन करें. इसके बाद भगवान को भोग लगाकर व्रत खोल लें.
 

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