तीज-त्योहारः ‘कामिका एकादशी’ है आज

तीज-त्योहारः ‘कामिका एकादशी’ है आज

भोपाल (महामीडिया) भगवान भोले की भक्ति के पवित्र श्रावण माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं मत मतांतर के अनुसार इसे कामदा एकादशी भी कहा जाता है। इस एकादशी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर एकादशी व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल से स्नान करवाकर विधिपूर्वक पूजन किया जाए तो सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य अनजाने में किए गए पापों से मुक्त हो जाता है। ब्रह्म हत्या तक के पाप से उसे छुटकारा मिल जाता है और धन संपत्ति से युक्त हो जाता है।
कामिका एकादशी के लाभ 
कामिका एकादशी का व्रत रखकर, भगवान विष्णु का पूजन विभिन्न मिष्ठान्न, फलों आदि से करने से जीवन के समस्त सुख प्राप्त होते हैं। जीवन में संयम और आध्यात्मिकता का विकास होता है। इस एकादशी का व्रत रखने वाले के जीवन से सारे अभाव समाप्त हो जाते हैं। सुख, सौभाग्य, संपत्ति, भूमि, रत्नाभूषणों की प्राप्ति होती है। इस व्रत के प्रभाव से गौ दान करने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस एकादशी को मोक्ष प्रदाता कहा गया है। इस व्रत को करने से मनुष्य कभी अकाल मृत्यु को प्राप्त नहीं होता। इस एकादशी की रात्रि में शुद्ध घी का दीपक भगवान विष्णु के समीप प्रज्ज्वलित करने से मोक्ष प्राप्त होता है।
 

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