गुरु-शिष्य परंपरा का पोषण कर रही है भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन

गुरु-शिष्य परंपरा का पोषण कर रही है भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन

उज्जैन (महामीडिया) भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन पांच हजार सालों से गुरु-शिष्य परंपरा का पोषण कर रही है। नगर की 40 से अधिक वेद पाठशालाओं में विद्यार्थी गुरुकुल परंपरा से वेद, व्याकरण, संस्कृत व साहित्य का अध्ययन कर रहे हैं। यहां महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान का मुख्यालय है। वहीं महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के रूप में वेदाध्ययन का प्रमुख केंद्र स्थापित किया है।
गुरुकुल पाठशालाओं में आज भी कृष्णकाल जीवंत है। उस समय की तरह ही अधिकांश पाठशालाएं आश्रमों में संचालित हो रही हैं। इनमें बटुक समस्त कार्य स्वयं करते हैं। वेशभूषा भी ब्राह्मणों की तरह होती है। सिर पर शिखा रखना अनिवार्य है। सुबह पांच बजे जागने के बाद नित्यकर्म और फिर प्रात: वंदन होता है। इसके बाद योग, व्यायाम करना अनिवार्य है। अल्पाहार के बाद कक्षाएं शुरू हो जाती हैं।
दोपहर में भोजन के बाद आश्रम सेवा होती है। इसमें गायों की देखभाल, बागवानी, आश्रम व अपने कक्ष की सफाई करना शामिल हैं। शाम को खेलकूद व व्यायाम के बाद संध्या वंदन होता है। रात्रि विश्राम से पूर्व स्वाध्याय व मनोरंजन के लिए नैतिक शिक्षा पर आधारित वाद-विवाद, कहानी आदि सुनाना दिनचर्या का हिस्सा है। रात्रि 10 बजे समस्त विद्यार्थी गुरु सेवा कर शयन के लिए जाते हैं।
उज्जैन में विद्या अध्ययन करने आए भगवान श्रीकृष्ण ने गुरुश्रेष्ठ सांदीपनि से 64 दिन में वेद, वेदांग, उपनिषद् तथा गीता का ज्ञान प्राप्त किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने चार दिन में चार वेद, छह दिन में छह शास्त्र, सोलह दिन में 16 कलाएं, अठारह दिन में 18 पुराण का ज्ञान प्राप्त किया था।

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